संवेदनशील और जनकेंद्रित प्रशासन की सशक्त पहचान : रोज़ेटा मेरी कुर्बाह

ईस्ट खासी हिल्स, मेघालय को बनाया समस्याओ से मुक्त

संवेदनशील और जनकेंद्रित प्रशासन की सशक्त पहचान : रोज़ेटा मेरी कुर्बाह

भारतीय प्रशासनिक सेवा में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल प्रशासनिक पदों से नहीं, बल्कि जनता के साथ उनके मानवीय जुड़ाव और जमीनी कार्यशैली से बनती है। असम-मेघालय कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोज़ेटा मेरी कुर्बाह उन्हीं अधिकारियों में शामिल हैं। राज्य सिविल सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस में पहुंचीं रोज़ेटा मेरी कुर्बाह ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव, शांत नेतृत्व और संवेदनशील कार्यशैली के माध्यम से मेघालय प्रशासन में एक अलग स्थान बनाया है। वर्तमान में वे ईस्ट खासी हिल्स जिले की उपायुक्त  के रूप में कार्यरत हैं। शिलॉन्ग जैसे प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जिले में उनका कार्यकाल सुशासन, चुनाव प्रबंधन और जनसहभागिता आधारित प्रशासन का उदाहरण माना जा रहा है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनका आईएएस वर्ष 2010 बैच से संबंध है।  राज्य सेवा में लंबे अनुभव ने उन्हें प्रशासन की जमीनी चुनौतियों को गहराई से समझने का अवसर दिया। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली में व्यावहारिकता, सामुदायिक संवाद और स्थानीय परिस्थितियों की समझ स्पष्ट दिखाई देती है।
उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर में मेघालय सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाईं। वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में सचिव रहीं, जहां उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया। इसके अलावा वे स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा सर्व शिक्षा अभियान (SSA) से भी जुड़ी रहीं। शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े विभागों में उनकी भूमिका ने उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों के साथ प्रत्यक्ष रूप से काम करने का अवसर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं, शिक्षा की चुनौतियों और स्वास्थ्य सेवाओं की सीमाओं को समझते हुए उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया।
मार्च 2023 में उन्हें ईस्ट खासी हिल्स जिले का उपायुक्त नियुक्त किया गया। ईस्ट खासी हिल्स मेघालय का सबसे महत्वपूर्ण जिला माना जाता है क्योंकि राज्य की राजधानी शिलॉन्ग इसी जिले में स्थित है। प्रशासनिक दृष्टि से यह जिला अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां राजनीतिक गतिविधियां, शहरी विकास, पर्यटन, शिक्षा संस्थान और सामाजिक विविधता प्रशासनिक जिम्मेदारियों को और अधिक जटिल बनाते हैं। ऐसे जिले में उपायुक्त के रूप में प्रभावी नेतृत्व देना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती होती है।
रोज़ेटा मेरी कुर्बाह ने इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को संतुलित और व्यवस्थित तरीके से निभाया। उनकी प्रशासनिक शैली की सबसे बड़ी विशेषता जनता के साथ संवाद और समन्वय आधारित कार्यप्रणाली रही। शिलॉन्ग और आसपास के क्षेत्रों में सामुदायिक संगठनों, स्थानीय निकायों और नागरिक समूहों के साथ उन्होंने सहयोगात्मक संबंध बनाए। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें एक संवेदनशील और सुलभ अधिकारी के रूप में देखा गया। आम लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता ने उन्हें “जन-प्रिय डीसी” जैसी पहचान दिलाई, जो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए सबसे बड़ा सामाजिक सम्मान माना जा सकता है।
चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में उनके नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। वर्ष 2026 में ईस्ट खासी हिल्स जिले को “बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार चुनाव प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि ईस्ट खासी हिल्स जैसे भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से जटिल जिले में चुनाव संचालन एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होता है।
रोज़ेटा मेरी कुर्बाह के नेतृत्व में मतदान केंद्रों की सुव्यवस्थित तैयारी, चुनाव कर्मियों की प्रभावी तैनाती और अंतिम छोर तक लॉजिस्टिक्स पहुंचाने का सफल मॉडल विकसित किया गया। बहुभाषी और विविध सामाजिक समूहों वाले जिले में शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव कराना प्रशासनिक दक्षता का बड़ा उदाहरण माना गया। इस उपलब्धि ने यह सिद्ध किया कि योजनाबद्ध रणनीति, टीमवर्क और सूक्ष्म प्रशासनिक निगरानी के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले उन्होंने ईवीएम डेमोंस्ट्रेशन वैन को लॉन्च किया ताकि मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के प्रति जागरूक किया जा सके। यह पहल चुनावी पारदर्शिता और मतदाता विश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी गई।
स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। नवंबर 2023 में उन्होंने ईस्ट खासी हिल्स में “सांस” कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य और विशेष रूप से निमोनिया जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।  इसके अतिरिक्त वे आपदा प्रबंधन और पूर्व तैयारी संबंधी गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। वर्ष 2026 में मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर आयोजित जिला स्तरीय बैठक में उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। 
रोज़ेटा मेरी कुर्बाह की प्रशासनिक शैली केवल सरकारी आदेशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसमें मानवीय संवेदनशीलता का स्पष्ट समावेश दिखाई देता है। वे सामुदायिक भागीदारी को प्रशासन का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं। पूर्वोत्तर भारत जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से विविध क्षेत्र में यह दृष्टिकोण अत्यंत प्रभावी माना जाता है। स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास आधारित संबंध बनाना उनकी प्रशासनिक सफलता का प्रमुख कारण रहा है।
उनकी कार्यशैली में शांति, संतुलन और संवाद की विशेष भूमिका दिखाई देती है। वे प्रशासनिक निर्णयों में कठोरता के बजाय सहभागिता और समझदारी को प्राथमिकता देती हैं। यही कारण है कि वे केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं बल्कि जनता और शासन के बीच विश्वास का सेतु बनकर उभरी हैं।
रोज़ेटा मेरी कुर्बाह की यात्रा यह दर्शाती है कि प्रशासनिक उत्कृष्टता केवल बड़े पदों या चर्चित अभियानों से नहीं, बल्कि निरंतर जनसेवा, संवेदनशील नेतृत्व और जमीनी अनुभव से निर्मित होती है। राज्य सिविल सेवा से आईएएस तक का उनका सफर अनेक महिला अधिकारियों और युवा प्रशासकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि प्रशासन में संवेदनशीलता, समर्पण और दूरदर्शिता हो तो शासन वास्तव में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। मेघालय के प्रशासनिक इतिहास में उनका नाम एक ऐसी अधिकारी के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने पद की शक्ति से अधिक जनता के विश्वास को महत्व दिया।