संकल्प और समर्पण की मिसाल है शीला ईरानी
शीला ईरानी
साधारणतया किसी राज्य में पुलिस सेवा के अधिकारी को प्रशासनिक सेवा में तभी लिया जाता है जब उसकी कार्यशैली से राज्य के प्रमुख प्रभावित हो । पटना शहर को स्वच्छ और अतिक्रमण मुक्त बनाने की कमान संभाल रही अपर नगर आयुक्त शीला ईरानी पुलिस सर्विसेज से है और 2018 में यहां हुई पोस्टिंग से पहले बीएमपी -01 में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर थी । माना जाता है कि इनकी कार्यकुशलता और मजबूत छवि के कारण बिहार के मुख्यमंत्री ने राजधानी को स्मार्ट सिटी के तौर पर स्वच्छ, अतिक्रमण मुक्त , अवैध निर्माण पर रोक आदि कार्य के सुचारू संचालन के लिए शीला ईरानी पर विश्वास किया । शीला पटना नगर निगम में नियुक्ति के साथ ही शहर को स्वच्छ रखने और यातायात सुगम करवाने को लेकर प्रयासरत हैं । डोर टू डोर कचरा संग्रहण की बेहतर व्यवस्था को शुरू करवाने के साथ ही वे सड़क पर कचड़ा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए चर्चित है । लेडी सिंघम के नाम से पटना में फेमस शीला ईरानी अवैध कब्जा करने वाले बड़े से बड़े माफियाओं पर कार्रवाई से नहीं घबराती ।शीला ईरानी का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ , पिता ज्वाइंट लेबर कमिश्नर थे और उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को उच्च मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी । शीला की स्कूलिंग गिरिडीह के कार्मेल स्कूल से हुई और उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया । वर्ष 2000 में ये पुलिस सर्विसेज में आ गई । एसपी रैंक की अधिकारी शीला पटना की ट्रेफिक डीएसपी , टाऊन डीएसपी के पोस्टिंग के दौरान अपनी कड़क और ईमानदार छवि के लिए मशहूर रही है । वर्ष 2002 में शीला ईरानी बिहार की पहली महिला पुलिस अधिकारी बनी जिन्होंने गणतंत्रता दिवस पर गांधी मैदान में परेड का नेतृत्व किया। विशिष्ट कार्य के लिए शीला ईरानी को इंटर्नल सिक्युरिटि अवार्ड और क्राईम कंट्रोल के लिए डीजीपी से प्रशस्ती पत्र भी प्राप्त हो चुका है । अपने बीस साल के कार्यकाल में उन्होने अपनी मजबूत कार्यशैली, ईमानदारी और कड़क छवि की छाप छोड़ी है ।
25 सशक्त महिला 2020 के फेम इंडिया - एशिया पोस्ट सर्वे में शीला ईरानी "हौसला" कैटगरी में प्रमुख स्थान पर है ।